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अध्यात्म अमृत | सनातन धर्म • ज्योतिष • गीता ज्ञान
सनातन • ज्योतिष • गीता

सनातन धर्म का शाश्वत प्रकाश,
आपके जीवन में

वेदों की वाणी, ग्रहों का विज्ञान और श्रीमद्भगवद्गीता का सार — तीनों का संगम, एक ही स्थान पर। अध्यात्म अमृत के साथ अपने भीतर की यात्रा आरंभ करें।

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आज का गीता ज्ञान

श्लोक जो दिशा दिखाए

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
"तेरा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में कभी नहीं। इसलिए तू कर्मफल की इच्छा से कर्म मत कर, और न ही अकर्म में तेरी आसक्ति हो।"
श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 2, श्लोक 47
हमारे विषय

तीन मार्ग, एक अमृत

प्रत्येक विषय आपको सत्य के निकट ले जाता है — धर्म से आचरण, ज्योतिष से समय-ज्ञान, और गीता से जीवन-दर्शन।

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